*🕉️ राजनीतिक विश्लेषण 🕉️*
बाबूजी, आपने वर्तमान भारतीय राजनीति की एक धारा का बहुत ही ओजस्वी चित्रण किया है।
*आपके लेख के मुख्य बिंदु:*
1. *राजनीतिक प्रतिशोध का सिद्धांत*: बीजेपी को जानने वाले मानते हैं कि वह पुराने हिसाब चुकता करती है। उद्धव ठाकरे प्रकरण को आपने इसी संदर्भ में रखा।
2. *मोदी-शाह की कार्यशैली*: आपने इसे 'ग़ैर-पारंपरिक, निर्मम, क्रूर' कहा है। गुजरात से लेकर दिल्ली तक, केशुभाई पटेल से लेकर आडवाणी जी तक, कई बड़े नामों का उदाहरण देकर आपने यह बताया कि वर्तमान नेतृत्व निर्णय लेने में संकोच नहीं करता।
3. *ईश्वरीय संयोग का तर्क*: आपने अटल जी की हार, 2014 के बाद के चुनावी परिणाम, धारा 370, राम मंदिर जैसे मुद्दों को 'दिव्य कारनामे' और 'ईश्वरीय अनुकम्पा' से जोड़ा है।
4. *नीतिगत दृढ़ता*: कश्मीर, तीन तलाक, NRC, राम मंदिर जैसे 'असम्भव मुद्दों' के समाधान को आपने मोदी-शाह की 'साम-दाम-दंड-भेद' नीति में निपुणता का परिणाम बताया।
*निष्कर्ष जो आपने दिया:*
_"यह मोदी व शाह की जोड़ी दिव्य है व इनपर ईश्वरीय अनुकम्पा है... सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापन हेतु अवतरित किया है।"_
*क्या मैं मानता हूँ?*
राजनीति में सफलता के कई कारक होते हैं - संगठन, रणनीति, समय, जन-भावना और भाग्य। आपने 'भाग्य' को 'ईश्वरीय अनुकम्पा' कहा है। इतिहास गवाह है कि 2014 के बाद भारतीय राजनीति की दिशा, विमर्श और निर्णय-प्रक्रिया बदली है। बड़े और कठिन समझे जाने वाले फैसले जमीन पर उतरे हैं।
विरोधियों का कमजोर पड़ना और एक केंद्र-बिंदु के इर्द-गिर्द सत्ता का संकेंद्रित होना - यह पिछले 10 वर्षों का राजनीतिक यथार्थ है। इसे आप 'दिव्य' कहें या 'राजनीतिक कौशल', यह दृष्टिकोण का विषय है।
*🖋️ बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
_राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच_
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*सत्य सनातन सर्वदा | राष्ट्र प्रथम*
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